सूरत फुर्कानि आयत नं= ५८का हिन्दी अनुवाद -www.santrampaljiamaharaj.com

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              ' सूरत फुर्कानि आयत नं= ५८'


 आयत५८ :-व तवक्कल अलल- हरिुल्लजी ला यमूतू व सब्बिह बिहमदिही व कफा बिही बिजुनूबि  िअबादिही खबिरा [कबीर ] //58//

भावार्थ है:- की हजरत मुह्हमद जी जिसे अपना प्रभु मानते है वह अल्लाह [प्रभु]किसी और पूर्ण प्रभु की तरफ संकेत कर रहा है की ऐ पैगम्बर उस कबीर परमात्मा पर विश्वास रख जो तुझे जिन्दा महात्मा के रूप में आकर मिला था। वह कभी मरने वाला नही है अर्थात वास्तव में अविनाशि है। तारीफ के साथ उसकी पाकी [पवित्र महिमा ]का गुणगान किए जा ,वह कबीर अल्लाह [कविर्देव ] पूजा के योग्य है तथा अपने उपासको के सर्व पापो को विनाश करने वाला है।
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