परमात्म कबीर जी के लोकप्रिय दोहे-www.santrampaljiamaharaj.com

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दोहे = हिन्दू कहे मोहि राम पियारा ,तुर्क कहे रहमाना
            आपस में दोउ लड़ी- लड़ी मरे ,मरमजाना
  कोई              


अर्थ =  कबीर परमेश्वर कहते है की हिंदू को राम प्यारा और मुसलमानो[तुर्क] रहमान। इसी बात पर वे आपस में झगड़ते रहते हे लेकिन सच्चाई को नही जान पाते।
     
                                                       
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दोहे =         कल करे सो आज कर,आज करे सो अब 
                   पल में प्रलय होएगी,बहुरि करेगो  कब। 

 अर्थ =  कबीर परमेश्वर कहते है,जो कल करना हे उसे आज करो और    जो आज करना हे उसे अभी करो। प्रलय पल में हो जाती है। तो फिर करोगे  कब।  
घड़े
 दोहे =           धीरे-धीरे रे मना,धीरे सब कुछ होय।
                      माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आये फल पाय। 
  
 अर्थ =  कबीर परमेश्वर कहते है,हमेसा धैर्य से काम लेना चाहिए। अगर माली एक दिन में सौ घड़े भी सिच लेगा तो भी फल ऋतू आने पर ही लगेंगे 

 दोहे =         पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ पंडित भया न कोय                                            ढाई आखर प्रेम का पढे सो पंडित होय। 

  अर्थ =  कबीर परमेश्वर कहते है उच्च ज्ञान पा लेने से कोई भी व्यक्ति विध्वान नही बन जाता अक्षर और शब्दो का ज्ञान होने के पश्च्यात भी अगर उसके अर्थ के मोल को कोई ना समझा सके ज्ञान की करुणा को ना समझ सके तो वह अज्ञानी  है.परन्तु जिस किसी ने भी प्रेम के ढाई अक्षर को सही रूप से समझ लिया हो वही सच्चा और सही विध्वान है। 




  दोहे =         चाह मिटी चिंता मिटी मानवाह  बेपरवाह, 
                     जिसको कुछ नही चाहीऐ वो हे शहनशाह।  

   अर्थ =  कबीर परमेश्वर कहते है इस जीवन में जिस किसी को भी भक्ति के मन में लोभ नही मोह माया नही जिसको कुछ भी खोने का डर नही जिसका मन जीवन के भोग विलास से बेपरवाह हो चूका हे वही सही  मायने में इस विश्व का राजा महाराजा है। 

 दोहे =        बुरा जो देखन में चला बुरा न मिलिया कोय  ,
                    जो खोज मन आपना, मुझसे बुरा ना कोय। 
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 अर्थ =  कबीर परमेश्वर कहते है जब में पुरे संसार में बुराई ढूंढने के लिए निकल मुझे कोई भी किसी भी प्रकार की बुरा और बुराईनही मिली परन्तु ,जब मेने स्वयं को देखा तो मुझसे बुरा कोई न मिला। कहने का तात्पर्य यह हे की जो व्यक्ति अन्य लोगो में गलतिया ढूंढते हे वही सबसे ज्यादा गलतऔर बुराई से भरे हुऐ होते है। 

  दोहे =       माटी कहे कुमार से तू क्यों रौंदे मोय ,
                   एक दिन ऐसा आयगा में रौंदुंगी तोय। 


 अर्थ =  कबीर परमेश्वर कहते है,मिटटी कुम्हार से कहती है तु क्या मुझे गुदेंगा। मुझे आकर देगा एक ऐसा दिन आएगा जब में तुझे रौंदुंगी। समझने की बात यह है। की जीवन में आप राजा हो या गरीब आखिर में सभी को मिटटी में मिल जाना है। 
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