रजगुण ब्रह्मा जी ,सतगुण विष्णु जी ,तमगुण शिव जी की पूजा भगवत गीता में मना हैwww.santrampaljiamaharaj.com



तीनो गुण [ रजगुण ब्रह्मा जी ,सतगुण विष्णु जी ,तमगुण शिव जी ] की पूजा गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15 तथा 20 से 23 में मना है तथा श्राद्ध निकलना  अर्थात पितर पूजा,पिण्ड भरवाना ,फूल [अस्थियां ]उठा कर गंगा में क्रिया करवाना ,तेहरवी सतरहवी ,महीना ,छः माहि ,वर्षी आदि करना गीता अध्याय 9 श्लोक 25 में मना है। व्रत रखना गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में मना है। लिखा है  की -हे अर्जुन। योग [भक्ति ] न तो बिल्कुल न खाने वाले [व्रत रखने वाला ]का सिद्ध होता है। ....... अर्थात व्रत रखना मना है। ,,,,सत भक्तिमार्ग जो सभी धर्मो के शास्त्रो  , के आधार पर दि जाती है। उसकी प्राप्ति के लिए संत रामपालजी महाराज से नाम उपदेश ले और अपना कल्याण कराऐ। 
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